रास्ते तो गुम हो गये ,मंज़िल भी भूल आया हू मैं
कुछ देर ओर सही, किसी मोड़ पर रुक गया हू मैं
चलना नहीं भूला ,आज फिर से चला हू मैं
अंधेरा बहुत है रास्ते मे मेरे ,
अंधेरा बहुत है रास्ते मे मेरे ,
पर किस्मत का खेल देखो जो चाँद चलरा है साथ साथ मेरे
निकला हू फिर से ये सोच के मंज़िल की ओर
निकला हू फिर से ये सोच के मंज़िल की ओर
हर समस्या से लड़ जाऊंगा जो आयेगी मेरे ओर
पर आज वहा नहि हू मैं ,जहां से कल चला था मे ,
पर आज वहा नहि हू मैं ,जहां से कल चला था मे ,
अपने सपनो को पूरा करने के लिए ,थोड़ा दूर तो आ गया हू मैं
अपने सपनो को पूरा करने के लिए ,थोड़ा दूर तो आ गया हू मैं
यूही चलता रहा , यूही चलता रहा मैं ,
तो मंज़िल पे पहुँच जाऊंगा मैं ,
कल जहा से चला था ,आज वहा नहीं लोट पाउँगा मैं
कुछ देर ओर सही, किसी मोड़ पर रुक गया हू मैं
चलना नहीं भूला ,आज फिर से चला हू मैं
अंधेरा बहुत है रास्ते मे मेरे ,
अंधेरा बहुत है रास्ते मे मेरे ,
पर किस्मत का खेल देखो जो चाँद चलरा है साथ साथ मेरे
निकला हू फिर से ये सोच के मंज़िल की ओर
निकला हू फिर से ये सोच के मंज़िल की ओर
हर समस्या से लड़ जाऊंगा जो आयेगी मेरे ओर
पर आज वहा नहि हू मैं ,जहां से कल चला था मे ,
पर आज वहा नहि हू मैं ,जहां से कल चला था मे ,
अपने सपनो को पूरा करने के लिए ,थोड़ा दूर तो आ गया हू मैं
अपने सपनो को पूरा करने के लिए ,थोड़ा दूर तो आ गया हू मैं
यूही चलता रहा , यूही चलता रहा मैं ,
तो मंज़िल पे पहुँच जाऊंगा मैं ,
कल जहा से चला था ,आज वहा नहीं लोट पाउँगा मैं
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